Paytm Founder & CEO विजय शेखर शर्मा के संघर्ष और सफलता की कहानी

Hello friends,आज हम आपको Paytm Founder & CEO विजय शेखर शर्मा के संघर्ष और सफलता की कहानी बताना चाहते है | हमें विश्वास है कि यह Success Story आपके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है | दोस्तों, हमने बहुत से लोगो को देखा है की वो अपने जीवन में बार-बार असफल होते रहते है और लगातार मिल रही असफलताओं से घबरा जाते हैं, जिसकी वजह से भविष्य में मिलने वाली सफलताओं से भी हाथ धो बैठते हैं और फिर दोष देते है किस्मत को । दोस्तों, हमें कभी भी किस्मत को दोष नहीं देना चाहिए,बल्कि किस्मत को दोष देने की बजाये,अपने हमे अंदर की कमियों को ढूंढ़ना चाहिये और फिर उन कमियों का आंकलन (Analyse) करना चाहिये, उसके बाद हमें अपनी कमियों को 1-1 कर दूर करना चाहिए ,जैसे-जैसे हमारे अंदर की कमिया 1-1 करके दूर होती जायेगी ,और धीरे धीरे हम अपनी सफलता के नजदीक आते जायेगे | आजतक जितने भी लोग सफल हुए है उन्होंने अपने जीवन में कभी भी असफलता की चिंता नहीं की ,वो असफलताओ से नहीं घबराते बल्कि उनका सामना कर अपने जीवन में आगे बढ़ते है |

ऐसी ही Success Story ,Paytm Founder & CEO विजय शेखर शर्मा की है ,जिन्होंने कभी भी अपने जीवन में हार नहीं मानी और सफलता को प्राप्त कर लिया |

शुरुआती जीवन (Starting Life) 

नाम विजय शेखर शर्मा
जन्म 8 जुलाई 1973
जन्म स्थान उत्तर प्रदेश, जिला अलीगढ़ ( गॉव विजयगढ़ )
बिजनेस Founder & CEO of Paytm and One97 Communications Limited

विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के अलीगढ जिले के एक छोटे से गॉव विजयगढ़ में 8 जुलाई 1973 को मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था | इनके पिता स्कूल में अध्यापक (Teacher) और माता ग्रहणी (Housewife) थी |

स्कूली जीवन(School Life) 

इनकी शुरुआती पढ़ाई अपने ही गाँव विजयगढ़ (अलीगढ़ ) के एक हिंदी मीडियम स्कूल में हुई।विजय शेखर शर्मा को बचपन से ही पढ़ने -लिखने का बहुत शोक था | ये शुरू से ही पढ़ने में बहुत होशियार थे ,इसीलिए कक्षा (Class) में हमेशा प्रथम (First) आते थे | 12th Class तक की पढ़ाई इन्होने अपने ही गाँव से पूरी की |

कॉलेज जीवन(College Life) 

उच्‍च शिक्षा कि पढ़ाई के लिये इन्हे अपना गाँव छोड़कर बहार जाना पड़ा और दिल्ली के (Delhi College of Engineering) में एडमिशन लिया | कॉलेज में एडमिशन(Admission) मिलने के बाद इन्हे बहुत सी परेशानीओ(Probelms) का सामना करना पड़ा, जिनमे सबसे बड़ी परेशानी थी इंग्लिश | क्योकि इन्होने अपनी 12th Class तक की शिक्षा हिंदी मीडियम स्कूल से की थी इसीलिए इनकी इंग्लिश बहुत कमजोर थी | Engineering College में टीचर जो भी Subject पढ़ाते थे वो सब उनके सर के ऊपर( समझ से बहार) से जाता था क्योकि सभी टीचर इंग्लिश में पढ़ाते थे ,जो उनकी समझ से बहार था | विजय शेखर शर्मा कॉलेज की शुरुआत में पहली सीट पर बैठा करते थे लेकिन जब प्रोफेसर उनसे अंग्रेजी में प्रशन पूछते थे तब वे चुप रहते थे और बहुत शर्मिंदगी महसूस करते थे , कई बार तो वे अपने लेक्चर को भी छोड़ देते थे और इंग्लिश की Knowledge ना होने के कारण इन्हे एग्जाम में बहुत प्रॉब्लम हुई और इनके एग्जाम में नंबर भी बहुत काम आये,लेकिन इन्होने हिम्मत नहीं हारी | और ठान लिया की अब मैं इंग्लिश को सीखकर ही रहूंगा ,चाहे कुछ भी हो जाए | और इसके बाद इन्होने अपने कॉलेज के दोस्तों की मदद से इंग्लिश सीखना सुरु कर दिया और साथ में इन्होने इंग्लिश डिक्शनरी(English Dictionary) ,मॅग्नीज़(Magzine), और बहुत सारी किताबे खरीदी ,जिससे वो अपनी इंग्लिश में सुधार(Improvement) करने लगे | और अपने लगातार प्रयास & मेहनत से एक दिन इन्होने इंग्लिश में बहुत अच्छी पकड़ बना की ,और अपनी इंग्लिश की कमी को दूर कर दिया |

 Business Life (व्यापारिक जीवन )

विजय शेखर शर्मा का अपनी Classes में मन ना लगने की वजह से ,वे Classes छोड़ देते थे ,और Computer Classes करने लगे और धीरे -धीरे कोडिंग(Coding) सीखने लगे | एक दिन अखबार में नौकरी से सम्बंधित एक विज्ञापन(Advertise) आया था ,जिसमे कंप्यूटर से सम्बंधित(Related) काम था | उन्होंने वो विज्ञापन(Advertise) देखा और और नौकरी के लिए इंटरव्यू देने चले गए | इंटरव्यू हुआ और वे नौकरी के लिए सेलेक्ट(Select) हो गए | लेकिन जब विजय शेखर शर्मा ने Interviewer से पुछा की हम आपकी कंपनी में यहाँ आकर नौकरी नहीं कर सकते क्योकि अभी हम कॉलेज में पढ़ते है और हम कॉलेज से ही आपका सारा काम कर देंगे ,यह बात सुनकर Interviewer नाराज हो गए ,लेकिन बाद में उनकी यह बात मान ली गयी | और college में रहकर ही कंपनी के लिए वेबसाइट बनाकर देने लगे | और इस काम से वह अच्छे पैसे कमाने लगे | जब वे अपने क्लासमेट से बाते करते थे तो उनके Classmate बाते तक नहीं करते थे | लेकिन विजय शेखर शर्मा के  Classmate उनसे कहते थे की तुम्हे तो अपने जीवन में कुछ करना नहीं लेकिन हमें तो पढ़ने दो | उनकी इस बात पर विजय को बुरा तो लगता था लेकिन वो कुछ भी नहीं कह पाते थे और चुप रहते थे | क्योकि उनको ,उनसे सब्जेक्ट नोट्स लेने होते थे ताकि पेपर में कुछ अच्छा कर सके | विजय अपनी इंग्लिश को ठीक करने के लिए पुरानी दिल्ली की संडे मार्किट से पुरानी किताबे और कामयाब लोगो की मैगज़ीन लाते थे ताकि वे उन्हें पढ़कर मोटीवेट हो सके और सोचते थे की जब ये लोग कॉलेज ड्राप आउट होकर सफल हो सकते है तो मै क्यों नहीं हो सकता | उन दिनों कंप्यूटर और इंटरनेट बहुत तरक्की कर रहे थे तब विजय ने भी कंप्यूटर से रिलेटेड काम करने की सोची ,उनके सपने बड़े थे और खुद पर विश्वास था की वो कामयाब हो सकते है |

Birth of XS Company (XS कंपनी की स्थापना)

विजय ने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक कंपनी खोली जिसका नाम XS था ,Business Cards छप गए और जिस पर फ़ोन नंबर हॉस्टल का था और पता अपने दोस्त के अंकल के घर का दे दिया | जब विजय ने अपनी कंपनी के बारे में अपने परिवार वालो को बताया तो उनके परिवार वाले नाराज़ हो गए क्योकि उनको लगता था की बिज़नेस में बहुत ही काम लोग कामयाब हो पाते है | कॉलेज में उनका 3rd Year था और वो भी सभी की तरह, घर वालो के कहने पर जॉब की तैयारी में लग गए | कॉलेज में एक अमेरिकन इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनी आयी ,इंटरव्यू में विजय और उनके दोस्त भी बैठे ,शुरुआत में विजय ने सभी प्रश्न के उत्तर दे दिए लेकिन जब इलेक्ट्रॉनिक्स से Related प्रश्न पूछने लगे तो वे उनके उत्तर नहीं दे पाये और उन्होंने  Interviewer  को सब सच बता दिया की मेरा Interest इंटरनेट में है और मै इंटरव्यू में घर वालो के दबाव में बैठा हु | उनकी यह बात सुनकर  Interviewer   ने उनसे इंटरनेट के बारे में पूछना स्टार्ट कर दिया और विजय ने सभी प्रश्नो के सही उत्तर दे दिए | कंपनी ने उनकी ईमानदारी और इंटरनेट में नॉलेज देखकर उनका और उनके दोस्त का सिलेक्शन इंटरनेट डिवीसीन में कर दिया | कंपनी कॉलेज में आयी थी इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर को हायर करने के लिए और विजय व उनके दोस्त को इंटरनेट डिवीसीन में सिलेक्शन मिल गया ,विजय व उनके दोस्त को क्लास में सबसे जयादा पैकेज मिला | जो की उनके क्लास के तोप्पेर्स के लिए सदमे से काम नहीं था | विजय ने कुछ महीने उस कंपनी में नौकरी करने के बाद ,वहा से नौकरी छोड़ दी | क्योकि वो कुछ बड़ा करना चाहते थे | उसके बाद उन्होंने अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर अपनी बंद पड़ी कंपनी को दोबारा स्टार्ट किया ,और कुछ समय बाद उनकी कंपनी को एक अमेरिकन कंपनी को खरीद लिया | उस समय विजय के हिस्से में कुल 35 लाख रुपए आये ,उस वक़्त उनकी उम्र 21 वर्ष थी,अपनी कंपनी बेचने के बाद विजय को उसी कंपनी में बहुत सारे पैसे और एक अच्छी पोस्ट मिल गयी | लेकिन विजय इससे भी खुश नहीं थे | उन्होंने सपना देख लिया था की ,किसी के अंडर में काम नहीं करना ,बल्कि अपनी खुद की कंपनी खोलनी है उनकी इस बात से उनके सारे दोस्त हैरान थे ,और विजय ने उस कंपनी से भी रिजाइन दे दिया |

Birth of One97 Company (One97 कंपनी की स्थापना)

उनके सभी दोस्त समझ नहीं पाए की आखिर विजय के दिमाग में क्या चल रहा है | विजय ने अपने हिस्से के पैसे से एक नई कंपनी खोली | जिसका नाम One97 रखा | विजय की नई कंपनी (One97)मोबाइल उसेर्स को रिंगटोन,जोक्स ,न्यूज़ ,सीबीएसई के रिजल्ट समस द्वारा ,और समस के द्वारा क्रिकेट स्कोर बताती थी | सब कुछ सही चल रहा था और कुछ ही समय में कंपनी के बहुत कस्टमर बन गए थे | लेकिन विजय की बिज़नेस में पूरी जानकारी ना होने की वजह से और अमेरिका में (9/11) में हमले की वजह से कंपनी धीरे – धीरे घाटे में जाने लग गयी | अमेरिका में हमले की वजह से सभी स्पोंसर चले गये,और विजय को धीरे – धीरे आठ लाख रुपए का कर्जा हो गया | और विजय की हालत इतनी बुरी हो गयी की वे छोटी -मोटी नौकरी करने लगे | लोगो के घर जाकर कंप्यूटर रिपेयर करने लगे ,खाने में कोल्ड ड्रिंक और बिस्किट खाते थे | यहाँ तक की कभी -कभी तो भूखा तक सोना पड़ता था | बस के किराये के लिए पैसे नहीं होते थे तो पैदल ही चलना पड़ता था ,उनकी इस हालत को देखकर कोई भी लड़की उनसे शादी करने को तैयार तक नहीं होती थी | लेकिन फिर भी विजय का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ | और वो मैदान में डटे रहे | उनके बुरे समय में उनका साथ दिया उनके करीबी CA पियूष अग्गरवाल जी ने ,उन्होंने विजय को आठ लाख रुपए दिए और विजय की कम्पनी की (40%) हिस्सेदारी खरीद ली | और इन पैसो की मदद से विजय (One97) कंपनी फिर से खड़ी हो गयी | विजय ने (One97) को फिर से रिंगटोन और बाकी सेवाओं की मदद से सुरु किया ,कंपनी एक बार फिर से काफी तरक्की करने लग गयी | और विजय ने कुछ ही समय में इस कंपनी को दुबारा करोडो रुपए की कंपनी बना दी | और चार साल बाद (CA)पियूष अग्गरवाल जी ने अपनी 40% हिस्सेदारी को 125 करोड़ में बेच दिया | CA पियूष अग्गरवाल जी ने आठ लाख रुपए इन्वेस्ट करके उन्होंने विजय की मदद से चार साल में 125 करोड़ रुपए कमा लिए |

Birth of Paytm Company (Paytm कंपनी की स्थापना)

भारत में जब 3G नेटवर्क लांच हुआ ,सभी कंपनी अपने -अपने कामो में तेज़ी से बदलाव करने लगी,उसी समय विजय ने भी एक ऐसी मोबाइल अप्प बनाने की सोची ,जिससे की देश की जनता को हमेशा पैसो को अपने पास न रखने पड़े | उनके खुल्ले पैसो की दिक्कत को दूर करने के लिए और ऑनलाइन पेमेंट के लिए उन्होंने (One97) के इन्वेस्टर के सामने पेटम बनाने का ऑफर रखा ,कोई भी इन्वेस्टर उनसे सहमत नहीं हुआ | और वो एक बार फिर से अकेले पड़ गए ,लेकिन कुछ ही महीनो के बाद फाइनली विजय ने पेटम मोबाइल वॉलेट एप्लीकेशन तैयार कर ली | एप्लीकेशन बन गयी थी,लेकिन उस समय इंडिया में लोग ऑनलाइन पेमेंट करते हुए थोड़ा डरते थे | विजय को ज़रुरत थी पेटम को बड़े लेवल पर प्रमोट करने की और उन्होंने इंडिया के घरेलु और अंतरास्ट्रीय क्रिकेट की स्पोंसरशिप लगभग 200 करोड़ रुपए में खरीदी | क्रिकेट ने विजय और पेटम दोनों को उस मुकाम तक पहुंचा दिया जहा विजय पहुंचना चाहते थे | इतनी मुश्किलो का सामना करने के बाद भी विजय की पेटम एप्लीकेशन आज सभी के मोबाइल में ज़रूर मिल जायेगी ,प्रारंभिक दौर में यह DTH recharge और prepaid mobile recharge के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही थी। फिर Paytm ने धीरे-धीरे अपनी services बढ़ानी शुरू की। पहले बिजली बिल, गैस का बिल payment की सुविधा दी और फिर Paytm ने अन्य e-commerce कंपनियों की तरह सामान बेचना शुरू कर दिया। और हाल में हुए note ban ने तो PayTM के लिए lottery का काम किया और देखते-देखते PayTM करोड़ों लोगों की ज़रुरत बना गया।
वर्तमान समय में Paytm भारत के सभी राज्यों में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज, data card रिचार्ज, पोस्टपेड मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट आदि की सेवाएँ प्रदान कर रहा है। आज Paytm भारत की सबसे लोकप्रिय online payment site है,विजय ने सन 2005 में मृदुला से शादी की |

विजय शेखर शर्मा हर उस भारतीय के लिए आदर्श है जो अपनी मेहनत से कुछ बनना चाहता है क्योकि यह उस इन्सान की कहानी है जिसने million dollar company का सपना तब देखा था जब उसकी जेब में खाना खाने के लिए 10 रूपये भी नहीं थे।

“उसे करने में कोई मजा नहीं है जो दूसरे आपसे करने को कहें, असली मजा उसे करने में है जो लोग कहें कि तुम नही कर सकते हो!”

चलिए Vijay Shekhar Sharma की तरह हम भी अपने सपनो को साकार करें और अपने जीवन में इतना कुछ करें कि “ये कुछ नहीं कर सकता” कहने वालों के मुंह हेमशा-हेमशा के लिए बंद हो जाएं!

दोस्तों जीवन में बड़े से बड़ा सपना देखो और उस सपने के लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करो ,सफलता ज़रूर मिलेगी | vijay की जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आये लेकिन फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी |

लेकिन आज वो देश के सभी युवाओ के लिए प्रेरणा है विजय के पेटम का ऑफिस नॉएडा में है ,दोस्तों हमको उम्मीद है की यह कहानी आपको बहुत पसंद आयी होगी और विजय के जीवन से आपको बहुत कुछ सिखने को मिला होगा | अगर आपको यह कहानी पसंद आयी तो आप हमें कमेंट करना ना भूले |

 

यदि आपके पास Hindi/English में कोई Article,Motivational/ Inspirational story या जानकारी है जोआप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Email Idहै:successduniya@yahoo.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!

330 views

One thought on “Paytm Founder & CEO विजय शेखर शर्मा के संघर्ष और सफलता की कहानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *